युवा कवि नीलेश “नील”
18 02 2007रायपुर में जन्में, भोपाल से मैकेनिकल इंजीनीयरिंग करने वाले युवा कवि नीलेश वर्तमान में लंदन में है। इनके बारे मे बशीर बद्र साहब कहते हैं ”नीलेश “नील” सच्ची कविताओं की नई आवाज़ है। इनकी कविताएं अपनी आहंग और मौसीक़ी (Rhythm and Music) के लिहाज़ से मुझे बादलों का सफ़र लगीं।”
बेआबरु
तुझे लूट के क्या हासिल करुं मैं
खुद जो लूट चुके तुझसे
हमें प्याला अपना ही दे दे
मिट जायेंगे तुझपे
उस रोज मैं फ़रिश्ता था
उस लम्हां तू फितरत हुई
अब हर दिन शैतान का-इंसान को
फ़र्क नहीं मिलता अपने खत्म होने तक………
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जुमेराती
( भोपाल शहर के नाम )
ये सड़क नहीं
काबिले-जन्नत है
जुमे की नमाज़ का मौसम है
बुजूर्गों की जमात है
बच्चों की ख़्वाहिश है
माहौल की नुमाईश है
शहर (भोपाल) का आशियाना यहां
ये सड़क नहीं
जन्नत की मुस्कान है
मुकद्दर का आईना है
मस्जिद की राह है
ईद की मोहब्बत है यहां
बेखौफ़ हर अंदाज़
की फ़ितरतें हैं यहां
यही है वो
चौदहवीं की राह
जुमेराती-जुमेराती-जुमेराती
(नीलेश “नील” के प्रथम हिंदी काव्य,ग़ज़ल,नज़्म और शे’र संग्रह “चुभन” से साभार)
अच्छा लगा नीलेश जी को पढ़कर. बधाई. आशा है भविष्य में भी आपको पढ़ते रहेंगे.संजीत को साधुवाद.
thanx sanjeet neelesh neel ji ka bahut naam suna tha aaj aapke madhyam se unhe pardne ka bhi mauka mila….thanx
thanku sanjeet ji main kavita kam padta hoin per ya mere ko achi lagi neelesh ji ki wah ustad wah (spell mistake dont mind plz)
प्रिय संजीत,
नीलेश की कविता का तेवर इधर की हिंदी कविता से काफ़ी अलग है . उसका अपना अलग रंग और आस्वाद है . बधाई!
प्रियंकर जी, सहमत हूं आपकी बात से। दरअसल नीलेश की कविताओं मे मौसीकी ज्यादा है इसलिए वर्तमान कविताओं से अलहदा हैं।