मैत्री
20 02 2007मैत्री
मित्रता
करोगे क्या तुम मुझसे
कहते हो
यदि तुम हां
तो चलो!
चलें मिलकर
हम पार क्षितिज के!
स्वीकार है यदि तुम्हें
मेरी मित्रता तो पाओगे सदा तुम
मुझे अपने पास,अपने साथ
चाहे सुख हो या दुख।
साथ दुंगा मैं तुम्हारा
रोने में भी
लेकिन करना होगा वादा
तुम्हें एक
रोने के बाद तुम हंसोगे भी।
साथ दुंगा मैं तुम्हारा हंसने में भी।
मैत्री इसे ही कहते हैं
मित्रता करोगे क्या तुम मुझसे
कहते हो यदि तुम हां
तो चलो………
tumhari mitrta hi anokhi hai ….aur haa ham bhi ye wada kerte hain ki rone ke baad hansayege tumhe bhi……
Wow sanjeetji,so well written .This is what real friendship is all about.Itni khoobsoorti se bayaan kiya…bohot hi umdaa.
1-ज़हेनसीब वैशाली जी।
2- शुक्रिया फ़लक गोयल जी।
क्या यार … अभी तक उसी मित्रता मे फँसे हुए हो .. अरे ये सारी बातें तो बहुत पुरानी हो गयी .. अब इनसे काम नही बनता ,, कुछ नया लिखो .. जो किसी ने ना सोचा हो और ना ही लिखा हो