नारी
8 03 2007महिला दिवस के अवसर पर जानी-अनजानी सभी महिलाओं को बधाई के साथ शुभकामनाएं कि वह जिस भी क्षेत्र में हों दिन-दुनी रात-चौगुनी तरक्की कर अपना व अपनों का नाम रौशन करें
नारी
झलकती है,
तुम्हारे विचारों से
चट्टानों सी दृढ़ता।
चमकता है,
तुम्हारी आंखों में
ख़्वाहिशों का आसमान।
झुक जाए पर्वत भी,
तुम्हारी इच्छाशक्ति के सामने।
बावजूद इसके,
भरी है
करूणा कूट-कूट कर
तुम्हारे मन में।
हो उठती है
नम तुम्हारी आंखें,
कई-कई बार
क्योंकि तुम
नारी हो
करूणत्व ही
तुम्हारी पहचान है।
झलकती है,
तुम्हारे विचारों से
चट्टानों सी दृढ़ता।
जी सच कहा
चमकता है,
तुम्हारी आंखों में
ख़्वाहिशों का आसमान।
ख्वाहिशे हैं तभी तो जिन्दगी है।
झुक जाए पर्वत भी,
तुम्हारी इच्छाशक्ति के सामने।
जिन्दगी अधुरी रह ना जायेगी इच्छाशक्ति के बिना।
बावजूद इसके,
भरी है
करूणा कूट-कूट कर
तुम्हारे मन में।
हो उठती है
नम तुम्हारी आंखें,
कई-कई बार
क्योंकि तुम
नारी हो
करूणत्व ही
तुम्हारी पहचान है।
हाँ यही पहचान नारी को सबसे अलग बनाती है, शक्ति को माता का रूप प्रदान करती है।
बहुत सहजता से और सुन्दर शब्दो मे नारी के अस्तित्व के बारे मे बताया है। अच्चा लगा।
बहुत शुक्रिया संजीत आपका.. और नारी भाव समझने का.. बस करूण्त्व को नारी की पह्चान मत बनाईये… उसकी सहन्शक्ति,दृढता उसकी पह्चान है..
Bahut khoob bhaiye.. Keep it up..
Regards..
Aman..
http://www.tigersinindia.blogspot.com
Thanks, sanjeet ji aapne naari ko shakti ke roop mai darshaya…karuna ke saath dhairya bhi naari ki pehchaan hai…bohot hi accha aur near to perfection ..likha hai….hope to read more on women empowerment.good going sanjeet ji….