सभी को होली की रंगारंग शुभकामनाएं

3 03 2007

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जब फागुन रंग झमकते हों
तब देख बहारें होली की
परियों के रंग दमकते हों
ख़ुम शीशे जाम छलकते हों
महबूब नशे में छकते हों
जब फागुन रंग झमकते हों
नाच रंगीली परियों का
कुछ भीगी तानें होली की
कुछ तबले खड़कें रंग भरे
कुछ घुँघरू ताल छनकते हों
जब फागुन रंग झमकते हों
मुँह लाल गुलाबी आँखें हों
और हाथों में पिचकारी हो
उस रंग भरी पिholi3.gifचकारी को
                                                अँगिया पर तक के मारी हो
                                              सीनों से रंग ढलकते हों
                                                  तब देख बहारें होली की
                                               जब फागुन रंग झमकते हों
                                      तब देख बहारें होली की
                                                                        –नज़ीर अकबराबादी

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युवा कवि नीलेश “नील”

18 02 2007

रायपुर में जन्में, भोपाल से मैकेनिकल इंजीनीयरिंग करने वाले युवा कवि नीलेश  वर्तमान में लंदन में है। इनके बारे मे बशीर बद्र साहब कहते हैं   “नीलेश “नील” सच्ची कविताओं की नई आवाज़ है।  इनकी कविताएं अपनी आहंग और मौसीक़ी (Rhythm and Music) के लिहाज़ से मुझे बादलों का सफ़र लगीं।”

बेआबरु

तुझे लूट के क्या हासिल करुं मैं
खुद जो लूट चुके तुझसे
हमें प्याला अपना ही दे दे
मिट जायेंगे तुझपे
उस रोज मैं फ़रिश्ता था
उस लम्हां तू फितरत हुई
अब हर दिन शैतान का-इंसान को
फ़र्क नहीं मिलता अपने खत्म होने तक………

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जुमेराती
( भोपाल शहर के नाम )

ये सड़क नहीं
काबिले-जन्नत है
जुमे की नमाज़ का मौसम है
बुजूर्गों की जमात है
बच्चों की ख़्वाहिश है
माहौल की नुमाईश है

शहर (भोपाल) का आशियाना यहां
ये सड़क नहीं
जन्नत की मुस्कान है
मुकद्दर का आईना है
मस्जिद की राह है
ईद की मोहब्बत है यहां
बेखौफ़ हर अंदाज़
की फ़ितरतें हैं यहां
यही है वो
चौदहवीं की  राह
जुमेराती-जुमेराती-जुमेराती

 

 

(नीलेश “नील” के प्रथम हिंदी काव्य,ग़ज़ल,नज़्म और शे’र संग्रह “चुभन” से साभार)





आना जब मेरे अच्छे दिन हों…

12 02 2007

2003 की गर्मियों में एक रविवार को जनसत्ता का रविवारी अंक पढ़ते हुए मेरी नज़र संतोष चौबे की इस कविता पर पड़ी, और तब से मानों यह कविता मेरे दिमाग मे ही घुमते रहती है ना जानें क्यों

आना जब मेरे अच्छे दिन हों…
(संतोष चौबे)

एक

आना
जब मेरे अच्छे दिन हों

जब दिल मे निष्कपट ज्योति की तरह
जलती हो
तुम्हारी क्षीण याद
और नीली लौ की तरह
कभी-कभी
चुभती हो इच्छा

जब मन के
अछूते कोने में
सहेजे  तुम्हारे चित्र पर
चढ़ी न हो धुल की परत

आना जैसे बारिश मे अचानक
आ जाए
कोई अच्छी सी पुस्तक हाथ
या कि  गर्मी में
छत पर सोते हुए
दिखे कोई अच्छा सा सपना

दो

जब दिमाग साफ़ हो
खुले आसमान की तरह
और् हवा की तरह
स्पष्ट हों दिशाएं
समुद्र के विस्तार सा
विशाल हो मन्
और पर्वत-सा अडिग हो
मुझ पर विश्वास

आना तब
वेगवान नदी की तरह
मुझे बहाने
आना
जैसे बादल आते हैं
रुठी धरती को मनाने

तीन

आना
जब शहर मे अमन चैन हो
और दहशत से अधमरी
न हो रही हों सड़कें

जब दूरदर्शन न उगलता हो
किसी मदांध विश्वनेता द्वारा छेड़े
युद्ध की दास्तान

आना जैसे ठंडी हवा का झोंका
आया अभी-अभी
आना जब हुई हो
युद्ध समाप्ति कि घोषणा
अभी-अभी

चार

आना
जब धन बहुत न हो
पर हो
हो यानि  इतना
कि बारिश में भीगते
ठहर कर कहीं
पी सकें
एक प्याला गर्म चाय

कि ठंड की दोपहर में
निकल सकें दूर तक
और जेबों में
भर सकें
मूंगफलियां

बैठ सके रेलगाड़ी में
फ़िर लौटें
बिना टिकट
छुपते-छुपाते
खत्म होने पर
अपनी थोड़ी सी जमा-पुंजी

आना
जब बहुत सरल
न हुई हो ज़िन्दगी

पांच

जब आत्म-दया से
डब-डबाया हो
मेरा मन

जब अन्धेरे की परतें
छाई हों चारो ओर
घनघोर निराशा की तरह

जब उठता हो
अपनी क्षमता पर से
मेरा विश्वास

तब देखो
मत आना

मत आना
दया या उपकार की तरह
आ सको,तो आना
बरसते प्यार की तरह

छह

छूना मुझे
एक बार फिर
और देखना
बाकी है सिहरन
वहां अब भी
जहां छुआ था तुमने
मुझे पहली पहली बार

झुकना
जैसे धूप की ओर झुके
कोई अधखिला गुलाब
और देखना
बसी है स्मृतियों मे
अब भी वही सुगंध
वही भीनी-भीनी सुगंध

पुकारना मुझे
लेकर मेरा नाम

उसी जगह से
और सुनना
प्रतिध्वनि में नाम
वही तुम्हारा प्यारा नाम

सात

मुझे अब भी याद है
लौटना
तुम्हारे घर से

रास्ते भर खिड़की से लगे रहना
एक छाया का
रास्ते भर
बनें रहना मन में
एक खुशबु का
रास्ते भर चलना एक कथा का
अनंतर

जब घिरे
और ढक ले मुझे
सब ओर से
तुम्हारी छाया

तब आना
खोजते हुए
किरण की तरह
अपना रास्ता

आठ

इतना हल्का
कि उड़ सकूं
पूरे आकाश में

इतना पवित्र
कि जुड़ सकूं
पूरी पृथ्वी से

इतना विशाल
कि समेट लूं
पूरा विश्व अपने में

इतना कोमल
कि पहचान लूं
हल्का सा कोमल स्पर्श

इतना समर्थ
कि तोड़ दूं
सारे तटबंध

देखना
मैं बदलूंगा एकदम
अगर तुम
आ गईं अचानक

नौ

देखो
तुम अब
आ भी जाओ
हो सकता है
तुम्हारे साथ ही
आ जाएं मेरे अच्छे दिन